सावधान! छोटे बच्चों की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट करना हो सकता है खतरनाक

आप भी अपने छोटे बच्चों की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं, उनके वीडियो पोस्ट करते हैं इंस्टाग्राम पर उन्हें डालते हैं फेसबुक पर डालते हैं और लोगों को बताते हैं की हमारा बच्चा कितना क्यूट है, हमारा बच्चा कितना स्मार्ट है हमारा बच्चा कैसे कैसे करतब कर रहा है हमारा बच्चा कैसे बाकी लोगों से अलग है. हमारे बच्चे का पहले जन्मदिन दूसरा जन्मदिन तीसरा जन्मदिन हमारे बच्चे के स्कूल का पहले दिन और भी बहुत सारी चीजें आप पोस्ट करते होंगे। अपने बच्चे के लिए अब आपको ऐसा नहीं करना चाहिए आपको सावधान रहने की आवश्यकता है।

Posting pictures of young children on social media can be dangerous

आज हम आपको यह बताएंगे की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस दूर में आपके छोटे बच्चों की तस्वीरें का बहुत दुरुपयोग हो सकता है जिससे वो आगे चलकर बहुत परेशानी में पढ़ सकते हैं उनका भविष्य खराब हो सकता है असम पुलिस ने सोशल मीडिया पर इसी विषय को लेकर एक जागरूकता अभियान शुरू किया है जिसका नाम है Don’t be Share# उन्होंने क्रिएट किया है।

जिसका कहता है Don’t be share अब आप कहेंगे share करने से क्या होता है तो पैरेंट का मतलब उन माता पिता से है जो अपने बच्चों की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेर करते हैं जो अपने बच्चों की वर्चुअल प्रवेशी की चिंता ना करते हुए उनकी तस्वीर और वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं और बाद में इन तस्वीरें का इस्तेमाल अलग-अलग तरह के अपराधों के लिए होता है।

बच्चों की जिन तस्वीरें और वीडियो को आप यादें समझ कर मेमोरी समझकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं और चाहते हैं की इन्हें लाइक्स मिले इन्हें रेट-विट्स मिले आपके रिश्तेदार आपके परिवार के लोग आपके दोस्त ने देख-देख कर खुश होते हैं वो अल में उन बच्चों का डाटा होता है डिजिटल डाटा होता है और यह डाटा हर तरीके से कही भी इस्तेमाल हो सकता है।

इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से 3 से 4 साल की बच्ची को तस्वीरें में 15 से 16 साल की एक लड़की के रूप में दिखाए जा सकता है फिर ये तस्वीर गलत तरीके से इंटरनेट पर कही भी इस्तेमाल हो सकती है अमेरिका ब्रिटेन और यूरोप के कई देश में हर दिन ऐसी कई घटनाएं होती हैं जहां माता-पिता की इसी गलती की वजह से हजारों बच्चों के वर्चुअल डाटा का इस्तेमाल करके उनकी तस्वीरें को साइबर फ्रॉड या दूसरे अपराधों के लिए इस्तेमाल कर लिया जाता है।

यह समस्या इतनी गंभीर हो चुकी है की फ्रांस में हाल ही में एक प्रस्ताव लाया गया है जो कहता है की अगर कोई माता पिता अपने बच्चों की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट करता है तो उन्हें जेल की सजा हो सकती है और यूरोप के बाकी देश भी ऐसा कानून लाने पर विचार कर रहे हैं और भारत में भी अब इस पर बहस शुरू हो गई है और असम पुलिस ने इसीलिए यह अभियान शुरू किया है।

हमारे देश में 92% परिवार ऐसे हैं जिसमे कम से कम एक सदस्य के पास स्मार्टफोन जरूर है और अब स्मार्टफोन इस्तेमाल करने के मामले में ग्रामीण भारत के लोग भी पीछे नहीं गांव गांव तक पहुंच गया है वर्ष 2021 में ग्रामीण भारत के 68% लोगों के पास स्मार्टफोन था और ग्रामीण इलाकों में 27% माता-पिता से थे जिन्होंने अपने बच्चों को स्मार्टफोन खरीद कर दिया है और शेयर में ये आंकड़ा है 58% का अब बड़ी बात यह है की हमारे देश के बहुत सारे माता-पिता अपने बच्चों के स्वास्थ्य से ज्यादा सोशल मीडिया पर उनकी मौजूदगी के बड़े में चिंता करते हैं लेकिन ये जुनून कितना खतरनाक है।

इसे आप एक उदाहरण से समझिए हाल ही में इंटरनेट पर एक घटना हुई जिसमें एक माता पिता अपने बच्चे से बात करते हुए उसके वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अक्सर पोस्ट किया करते थे लेकिन इस दौरान कुछ साइबर अपराधियों ने इस बच्चे की आवाज को कॉपी करके आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जारी वैसे ही आवाज में एक आपत्तिजना ऑडियो क्लिप बना लिया और इसके बाद इन लोगों ने उसे बच्ची के माता-पिता को ब्लैकमेल करते हुए कहा की अगर वो इस ऑडियो क्लिप को डिलीट करवाना चाहते हैं तो उन्हें पैसा देना पड़ेगा

और ये इस तरह की पहले और आखिरी घटना नहीं है और ऐसा भी नहीं है की जो माता-पिता सोशल मीडिया पर अपने बच्चों की वर्चुअल प्रवासी को पब्लिक कर रहे हैं वो खतरों के बड़े में नहीं जानते इसलिए जो प्राइवेसी है आपका जो निजी डाटा है ये सिर्फ बड़े लोगों के लिए नहीं है आपके बच्चों की भी प्रवेश है और अब आपको अपने साथ-साथ अपने बच्चों की प्रवेशी का भी ख्याल रखना पड़ेगा कम से कम तब तक जब तक वह बालिक नहीं हो जाते एक सर्वे में भारत के 98% माता-पिता ने माना की वह इसके खतरों को जानते हुए भी ऐसा करते हैं।

क्योंकि इससे बच्चों के जारी सोशल मीडिया पर उन्हें अटेंशन मिलती है लोग देखते हैं लाइक्स करते हैं रेट-वेट करते हैं इसके अलावा एक और सर्वे कहता है की भारत में 12% माता-पिता दिन में एक से ज्यादा बार अपने बच्चों की तस्वीर और वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं जबकि 40% माता पिता दिन में एक बार 36% माता-पिता हफ्ते में कम से कम एक बार और दिल्ली जैसे शहर में लगभग 39% और बेंगलुरु में 31% माता पिता दिन में कम से कम एक बार अपने बच्चों की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट जरूर करते हैं अकेले सिर्फ भारत में फेसबुक पर हर दिन 9:30 करोड़ तस्वीर फेसबुक पर पोस्ट होती हैं।

जिससे अनुमान है की 48 लाख से ज्यादा तस्वीर हैं 18 साल से कम उम्र के बच्चों की होती है यहां एक विरोधाभास यह भी है, की आप तो बिना सोच समझे अपने बच्चों की तस्वीर फेसबुक पर पोस्ट कर देते हैं लेकिन फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग कभी भी अपने बच्चे की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं तो अपने बच्चों के चेहरे छुपाने के लिए अपने बच्चों के चेहरे के ऊपर एक इमोजी लगा देते हैं और यहां बात सिर्फ मार्क जुकरबर्ग की नहीं है।

भारत में कुछ खिलाड़ी और सेलिब्रिटी भी ऐसा ही करते हैं लेकिन बाकी लोग अपने बच्चों की वर्चुअल प्रवेशी के बड़े में सोचते तक नहीं आज भी हमारे देश में बहुत सारे ऐसे माता-पिता हैं ऐसे लोग हैं उनमें से बहुत सारे लोग तो अपने देखा होगा बहुत सारे लोग सेलिब्रिटीज हैं खिलाड़ी हैं एक्टर्स हैं जो अपने बच्चों की तस्वीरें को सोशल मीडिया पर नहीं आने देते और बहुत सारे जो मीडिया के भी लोग होते हैं या फटॉग्रफर्स जो होते हैं जो उनका पीछा भी करते हैं तो वो उनसे रिक्वेस्ट करते हैं की आप कम से कम मेरे बच्चे की तस्वीर मत लीजिए और मेरे बच्चे की तस्वीर आप सोशल मीडिया पर या मीडिया पर मत डालिएगा।

उनमें विराट कोहली भी एक ऐसे ही पिता हैं जो विराट कोहली और अनुष्का शर्मा जो चाहते उनकी बच्ची है उसकी तस्वीर कही पर ना आए पुरी दुनिया में 80% बच्चे ऐसे हैं जिनकी तस्वीर हैं 2 साल की उम्र से ही सोशल मीडिया पर पोस्ट होना शुरू हो जाति है और यही बच्चे जब तक 5 साल के होते हैं तब तक उनकी एसी 15 तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट हो चुकी होती है और जब ये बच्चा 10 साल का होता है तो सोशल मीडिया पर उसकी औसत्तान 10000 तस्वीर इंटरनेट पर उपलब्ध होती हैं और उसे बच्चे की वर्चुअल प्रवेशी पुरी तरह से समाप्त हो चुकी होती है और फिर इन बच्चों का ये वर्चुअल डाटा अलग-अलग अपराधों के लिए इस्तेमाल होने लगता है।

वर्ष 2017 में अमेरिका में जिन 48% बच्चों की किडनैपिंग हुई अपराधियों को उन बच्चों की साड़ी जानकारी उनके माता-पिता के सोशल मीडिया अकाउंट से ही मिली थी इसके अलावा भारत में हाल ही में एक सर्वे में बताया गया की बच्चों की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से 45% मामलों में किडनैपिंग का खतरा बाढ़ जाता है 48% मामलों में ऐसे बच्चों की इंटरनेट पर स्टॉकिंग हो शक्ति है। और 31% बच्चों को साइबर बुलीइंग का शिकार बहुत आसानी से बनाया जा सकता है।

ब्रिटेन में 12 से 16 वर्ष के 70% बच्चों ने कहा की उनके माता पिता उनकी जो तस्वीर हैं सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं वो उनके पक्ष में नहीं है और इस पर रॉक लगती चाहिए और अगर भारत में भी इस तरह का कोई सर्वे होता है तो शायद यहां के बच्चे भी यही कहेंगे भारत के बहुत सारे लोगों को सोशल मीडिया का एक ऐसा नशा है की वो लाइक्स और व्यूज के लिए अपनी वर्चुअल प्रवेशी का बिल्कुल ध्यान नहीं रखते।

अनुमान है की वर्ष 2030 तक बच्चों की वर्चुअल प्रविसि खत्म होने से उनका डाटा हर साल 7000 करोड़ रुपए में दिखाना शुरू हो जाएगा बाजार में वो बेचा जाएगा भारत में लोग अपने ऑस्टिन ढाई घंटे सिर्फ रिल देखते हुए या रूल्स बनाते हुए बर्बाद कर रहे हैं और अब इन लोगों ने सोशल मीडिया के लिए अपने बच्चों का इस्तेमाल करना भी शुरू कर दिया है लेकिन साइबर पुलिस और सरकार अब इससे बहुत गंभीर मुद्दा मान रहे हैं।

और इसलिए आज हम आपको सावधान करना चाहते हैं तो हम आगे भी इस विषय को आपके सामने लेट रहेंगे और अभी अब मैं आपको बताऊंगा अभी हाल ही में ऐसे कई वीडियो चल रहे हैं की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से कैसे एक छोटी बच्ची का जो तस्वीर है उसे छोटी बच्ची के तस्वीर को एक बड़ी बच्ची के रूप में बनाया जा सकता है।

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