शेयर बाजार में एनएससी और बीएससी क्या है (NSC and BSC Stock Exchange) ?

दोस्तों आज की जानकारी में हम जानने वाले हैं एनएससी और बीएससी क्या है। एनएससी और बीएससी भारत के 2 बड़े स्टॉक एक्सचेंज कंपनी से जिसके माध्यम से कंपनी अपने मार्केट को बढ़ाने के लिए लोगों को शेयर बेचती है और लोगों से शेयर के बदले पैसे ले लेती है। कंपनी और लोगों के बीच मैं एनएससी और बीएससी एक्सचेंज का काम करते हैं।

  1. शेयर-बाजार-में-एनएससी-और-बीएससी-क्या-है

एनएससी और बीएससी दोनों ही मुंबई की एक्सचेंज कंपनी है जिस का ऑफिस मुंबई में है एनएससी यानी कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज इसका निर्देश निफ़्टी होता है और बीएससी यानी कि बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में सेंसेक्स होता है और आगे हम जाने के निफ्टी और सेंसेक्स के बारे में भी।

एनएससी और बीएससी क्या है What is NSC and BSC ?

एनएससी और बीएससी भारत के 2 बड़े स्टॉक एक्सचेंज कंपनी है। आपको नाम से ही पता चल गया होगा जहां पर स्टॉक के लेनदेन होती है। एक्सचेंज का मतलब यही होता है कि सेलर से शेयर लेकर के बायर को देना या बायर से शेयर को लेकर के सेलर को देना। मतलब एनएससी और बीएससी एक मध्यम का काम करता है 2016 तक के आंकड़ों से भारत में कुल 23 स्टॉक एक्सचेंज कंपनी है। जैसे कोलकाता स्टॉक एक्सचेंज,चेन्नई स्टॉक एक्सचेंज,जयपुर स्टॉक एक्सचेंज इसी तरह से कई स्टॉक एक्सचेंज कंपनी है। लेकिन एनएससी और बीएससी में भारत में सबसे ज्यादा ट्रेडिंग होती है।

एनएससी और बीएससी स्टॉक एक्सचेंज में सेबी के नियम लागू होते हैं। सेबी मतलब सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड आफ इंडिया है। सेबी की स्थापना गवर्नमेंट ऑफ इंडिया ने की थी स्टॉक मार्केट में कुछ गलत चीजें भी होने लगी थी इसलिए गवर्नमेंट ने उसे रोकने के लिए सेबी की स्थापना की जिस प्रकार बैंक के लिए आरबीआई है उसी प्रकार स्टॉक एक्सचेंज के लिए सेवी है।

एनएससी क्या है What is NSC ?

NSC का पूरा नाम नेशनल स्टॉक एक्सचेंज है जिसकी स्थापना 1992 में में हुई थी इसमें में कुल 16 से ज्यादा कंपनियां रजिस्टर है। जब एनएससी स्टॉक एक्सचेंज की स्थापना हुई थी तभी ट्रेडिंग का सारा प्रोसेस कंप्यूटराइज कर दिया गया। वहीं जहां शेयर की खरीदी और बिक्री करने में बहुत समय लग जाता था किसी शेयर को खरीदने और बेचने से महीने लगते थे लेकिन एनएससी के आने के बाद कुछ मिनटों में ही शेयर की खरीदी बिक्री हो जाती है। ऐसा कहा जाता है कि पहले बीएससी ने शेयर मार्केट से स्टॉक खरीदने के कंप्यूटराइज करने से मना किया था।

बीएससी क्या है What is BSC ?

बीएससी का पूरा नाम बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज है इसकी स्थापना 1875 में प्रेमचंद रॉय की थी। थी कुल 55 सौ से अधिक कंपनियां रजिस्टर है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज एशिया का सबसे पहला और पुराना स्टॉक एक्सचेंज है। पुराने जमाने में एक जगह तय की जाती थी जहां पर सारे ट्रेडर्स जमा हो जाते थे और वहां पर शेयर की खरीदी और बिक्री होती थी। ऐसा कहा जाता है कि बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज को कंप्यूटराइज करने में पहले मना कर दिया था फिर 1995 में बीएसईबी को भी कंप्यूटराइज कर दिया।

जब किसी भी कंपनी को अपने बिजनेस के लिए लोगों से पैसे लेने होते हैं तो वह अपने कंपनी के शेयर को एनएसई और बीएसई या दोनों पर रजिस्टर करवाते हैं और आईपीओ के जरिए अपने बिजनेस के लिए इन्वेस्टर से पैसे लेते हैं कोई भी रिटेल इन्वेस्टर एनएससी और बीएससी से डायरेक्ट शेयर नहीं ले सकते हैं। बल्कि यहां पर एनएसई और बीएसई शेयर को खरीदने और बेचने के लिए दो खिड़कियों के जैसे काम करता है।

जैसे आप किसी सिनेमा हॉल में जाते हैं। या देखे होंगे सिनेमा के टिकट बेचने के लिए एक या दो खिड़कियां होती हैं। जिसमें टिकट का पैसा फिक्स होता है लेकिन उसे बेचने के लिए एक या दो, दो या तीन खिड़कियां बनी होती हैं। आप अलग-अलग खिड़कियों से टिकट खरीदते हैं टोटल टिकट कितना होता है वह सिनेमा हॉल में बैठने की संख्या है उसी तरह से जो कंपनी एनएससी और बीएससी में रजिस्टर होते हैं उसके जो शेयर होते हैं फिक्स होते हैं। उसे या एनएससी से खरीदे है बीएससी से।

और यहां पर आप बीएससी और एनएससी से डायरेक्ट शेयर नहीं खरीद सकते यहां पर भी एजेंट होते हैं वहांसे हमको शेयर को खरीदना होता है। यह एजेंट एनएससी और बीएससी से शेयर खरीदने के लिए मिडिएटर का काम करते हैं। जिसेसे हम शेयर बुक कर सकते हैं एनएसई और बीएसई के ग्रोथ और फॉल को दिखाने के लिए यानी कि मेडिएटर जो एजेंट का काम करता है उसे हम ब्रोकर कहते हैं। एनएसई और बीएसई में रजिस्टर सभी कंपनियों के उतार और चढ़ाव को दिखाने के लिए बहुत से इंडिसेज बनाए गए हैं जैसे nifty50, निफ़्टी बैंक निफ़्टी ऑटो, और बीएससी में बीएसई सेंसेक्स, बीएसई स्मॉलकप, bse-midcap जैसे कई इंडिसेज बनाए गए हैं जिसमें हमें सभी कंपनियों के उतार और चढ़ाव को आसानी से देख सकते हैं।

अगर आप एनएससी से शेयर खरीदते हैं और उसी दिन से शेयर को बीएससी में बेचना चाहते हैं तो यहां पर आपको ध्यान रखना है कि ऐसा नहीं कर सकते यदि आप ऐसा करते हैं आप को 20% की पेनल्टी देनी पड़ सकती है तो आप को ध्यान में रखना हैं। एनएससी से खरीदे गए शेयर को उसी दिन बीएससी में नहीं बेचना है। वहीं यदि आप डिलीवरी में एनएससी से शेयर खरीदते हैं। और आप उसे T+2 दिन के बाद बीएससी में बेचते हैं तो कोई प्रॉब्लम नहीं होती है। इसमें कोई चार्ज नहीं लगता है। लेकिन हमारी यही सलाह है कि यदि आप एनएससी स्टॉक एक्सचेंज शेयर लेते हैं तो एनएससी में ही बेचे और यदि आप बीएससी से शेयर लेते हैं तो बीएससी स्टॉक एक्सचेंज में ही बेचे।

बीएससी और एमएससी कौन सबसे अच्छा है

तो जैसा कि आप जानते ही होंगे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज इंडिया के दो सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज कंपनी है। इसके अलावा भी बहुत सारे स्टॉक चेंज कंपनी है लेकिन उनमें इन दोनों से ज्यादा स्टॉक एक्सचेंज नहीं होता है तो आइए जानते हैं कुछ ऐसी बातें जो दोनों में से किसी एक को बेहतर बनाते हैं।

  • बीएससी 1875 में बनाया गया अंग्रेजों के जमाने में और एनएससी 1992 में बनाया गया जो बीएससी के मुकाबले नया है।
  • बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज एशिया का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज है। और बीएससी के अंदर 5000 से अधिक कंपनी लिस्टेड है। वही एनएससी पर करीब दो हजार से ज्यादा कंपनी लिस्टेड है।
  • बीएससी अपने आप में एक पब्लिकली लिस्टेड कंपनी है लेकिन एनएससी एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है।
  • बीएससी की वेबसाइट nscindia.com है और एनएससी की वेबसाइट nscindia.com है।

यह दोनों कंपनी बीएससी और एमएससी अलग-अलग हैं लेकिन यह सेबी के अंदर काम करते हैं जो भी सेबी के गाइडलाइंस है उसी पर कार्य करते हैं।

जब से सेबी आया है तब से एनएससी और बीएससी के बीच एक बैटल चल रहा है शेयर वैल्यू को अट्रैक्ट करने के लिए क्युकी जितना ज्यादा ट्रेडिंग होगा जिस स्टॉक एक्सचेंज में उतना ही ज्यादा पैसा एक्सचेंज कंपनी की कमाती है। तो चलिए देख लेते हैं। ट्रेडर्स को आकर्षित करने के लिए कंपनियां क्या क्या करती हूं कौन सबसे बेहतर सर्विस देता है।

लिक्विडिटी (Liquidity)

ट्रेडर्स के लिए स्टॉक या इंडेक्स में लिक्विडिटी होना बहुत जरूरी होता है क्योंकि अधिक लिक्विडिटी का मतलब होता है स्प्रेड्स टाइटल्स, लोअर स्लिपरसे और किसी भी ट्रेड में अंदर जाना और बाहर आना काफी आसान हो जाता है। लिक्विडिटी इंट्राडे और स्विंग ट्रेडर्स के लिए सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट होता है तो लिक्विडिटी कंपेयर करने के लिए हमको इन दोनों स्टॉक एक्सचेंज कंपनियों का टर्नओवर चेक करना होगा। तो टर्नओवर हमको यह बताता है किसी हफ्ते महीने या साल में उस एक्सचेंज कंपनी पर कितने लाखों और करोड़ों का इनकम होगा।

और यदि किसी कंपनी में बहुत ज्यादा ट्रेडर है उसका मतलब उसका टर्नओवर ज्यादा हो रहा है। और ज्यादा ट्रेडर्स उस स्टॉक एक्सचेंज में ट्रेड कर रहे हैं।

अगर एनएससी और बीएससी में टर्नओवर कंपेयर करें तो सबसे ज्यादा ट्रेडिंग एनएससी स्टॉक एक्सचेंज में हो रही है। जिसके कंपैरिजन बीएसई स्टॉक एक्सचेंज में बहुत ही कम ट्रेडर्स ट्रेड कर रहे हैं इसका मतलब नेशनल स्टॉक एक्सचेंज कंपनी में अधिक टर्नओवर हो रहा है और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज कंपनी में कम ट्रेड हो रहा है।

Veriety Of Stocks

तो जैसा कि आप जानते हैं बीएससी के अंदर करीब 5000 से ज्यादा कंपनियां लिस्टेड है और एनएससी पर 2000 से भी कम कंपनियां लिस्टेड हैं ऐसा क्यों है। तो ऐसा इसलिए है कि किसी भी कंपनी को एनएससी पर लिस्ट करने के लिए रूल ज्यादा स्ट्रिक्स है और वहीं पर यदि किसी कंपनी को बीएससी में लिस्ट करना होता है जिसके रूल और रिलेशन एनएससी के कंपैरिजन में कम है। बीएससी में लो क्वालिटी की कंपनियां भी आसानी से लिस्ट हो जाते हैं।

ट्रेडिंग करते समय शेयर को खरीदते समय पहले ही ध्यान में रखें की हमे एनएससी स्टॉक एक्सचेंज से शेयर करदनी है या बीएससी स्टॉक एक्सचेंज से शेयर करीदना है। दोनों स्टॉक में से किसी एक सिलेक्ट करने के बाद ही शेयर करें।

तो आज की जानकारी में हमने आपको एनएससी और बीएससी स्टॉक एक्सचेंज के बारे में बताया यदि आपको इस जानकारी से संबंधित कुछ पूछना है या कोई डाउट है तो कमेंट करके हम से पूछ सकते है।

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